काशी के औरंगाबाद हाउस का इतिहास, जहाँ दारा शिकोह से लेकर देश के दिग्गजों ने डाले थे डेरे

काशी के ऐतिहासिक औरंगाबाद हाउस और पंडित कमलापति त्रिपाठी के राजनीतिक सफर की अनकही कहानियां। जानिए कैसे यह आशियाना उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र रहा।

काशी में एक पुरानी कहावत बहुत प्रचलित है—‘काशी बसें तो क्या बसें, घर औरंगाबाद।’ यह कहावत उस दौर में सामने आई थी जब काशी के कुछ ब्राह्मणों के विरोध के बावजूद पंडित रामनंदपति त्रिपाठी ने मुगल शहजादे दारा शिकोह को संस्कृत की शिक्षा दी थी और दारा शिकोह के अनुरोध पर ‘विराट विवरणम्’ की रचना की थी। देवरिया से आकर काशी के औरंगाबाद इलाके में बसे त्रिपाठी परिवार का यह निवास स्थान आज ‘द औरंगाबाद हाउस’ के नाम से जाना जाता है। इस ऐतिहासिक आशियाने में दारा शिकोह से लेकर महात्मा गांधी, महामना मदन मोहन मालवीय, पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी जैसे दिग्गज हस्तियां आ चुकी हैं।

🗳️ चार दशक तक उत्तर प्रदेश की राजनीति का पावर सेंटर: औरंगाबाद हाउस से तय होती थीं यूपी चुनाव की 250 सीटें

पूर्व मुख्यमंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी के पौत्र और टीएमसी नेता राजेशपति त्रिपाठी बताते हैं कि 1905 से ही इस परिवार का कांग्रेस और राजनीति से गहरा नाता रहा है। एक दौर ऐसा भी था जब औरंगाबाद हाउस उत्तर प्रदेश की राजनीति का मुख्य केंद्र बन चुका था। सीबी गुप्ता और कमलापति त्रिपाठी के नेतृत्व में प्रदेश के तमाम राजनीतिक और नीतिगत फैसले यहीं से लिए जाते थे। 525 सीटों वाली विधानसभा में अकेले औरंगाबाद हाउस से 250 सीटों का हिसाब तय होता था। नेहरू जी के साथ साइकिल की सवारी से लेकर लाल बहादुर शास्त्री के साथ गहरी मित्रता तक, इस घर ने राजनीति के कई स्वर्ण स्वर्णिम पन्ने देखे हैं।

📜 इंदिरा गांधी की एक नाराजगी पर छोड़ दिया था रेल मंत्री का पद: कांग्रेस के भविष्य को लेकर की गई थी भविष्यवाणी

संस्मरणों को साझा करते हुए राजेशपति त्रिपाठी ने बताया कि 1980 में इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल के दौर के प्रदर्शन पर टिप्पणी किए जाने से आहत होकर पंडित कमलापति त्रिपाठी ने तुरंत रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। इंदिरा जी के लाख मनाने के बावजूद वह अपने फैसले पर अडिग रहे थे। इसके अलावा, साल 1989 के दौर में ही उन्होंने कांग्रेस की कार्यशैली और जमीनी हकीकत को भांपते हुए यह भविष्यवाणी कर दी थी कि यदि बड़े नेता जनता और कार्यकर्ताओं से दूर रहेंगे, तो आने वाले समय में पार्टी को बचा पाना बेहद मुश्किल होगा।

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