नया नोएडा बसने में हुई 4 साल की देरी, जमीन अधिग्रहण न होने से अब 2030-31 तक शुरू होगा आबाद होना

नोएडा प्राधिकरण की शुरुआती योजना के विपरीत अब नया नोएडा वर्ष 2030-31 तक बसना शुरू होगा। जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की दरों को लेकर बढ़ी मुश्किलें।

नया नोएडा अब अपनी शुरुआती तय समयसीमा से करीब चार साल की देरी से बसेगा। नोएडा प्राधिकरण की शुरुआती योजना के अनुसार मार्च 2027 तक नए नोएडा के पहले चरण के हिस्से को बसाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन प्रशासनिक और कागजी देरी के चलते अभी तक एक इंच भी जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सका है। ऐसी स्थिति को देखते हुए अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2030-31 तक ही यह नया शहर बसना शुरू हो पाएगा।

🗺️ 2. दादरी और बुलंदशहर के 80 गांवों की जमीन पर प्रस्तावित है प्रोजेक्ट, चार चरणों में पूरा होना है काम

कागजों में नए नोएडा का आधिकारिक नाम ‘दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र’ रखा गया है। यह नया शहर कुल 210 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्रफल में बसाया जाना है, जिसके लिए दादरी और बुलंदशहर के 80 गांवों की जमीन को चिन्हित किया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट को कुल चार चरणों में पूरा करने का प्रस्ताव है। इसका मास्टर प्लान 2041 तैयार करने के लिए 9 जुलाई 2021 को प्राधिकरण और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) दिल्ली के बीच अनुबंध हुआ था, लेकिन एसपीए द्वारा मास्टर प्लान देने और यूपी कैबिनेट से अक्टूबर 2024 में मंजूरी मिलने के बाद भी मुआवजा दर तय करने में प्राधिकरण ने डेढ़ साल का लंबा समय गंवा दिया।

⚠️ 3. देरी के कारण बढ़ेंगी मुश्किलें: किसानों का विरोध, मुआवजे का दबाव और धड़ल्ले से बढ़ता अवैध अतिक्रमण

प्रोजेक्ट में देरी होने के कारण प्राधिकरण के सामने कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। पहला, समय बीतने के साथ किसान अब आसानी से कम दरों पर जमीन नहीं देंगे और अधिक मुआवजे की मांग करेंगे। दूसरा, पहले चरण के लिए चिन्हित गांवों में रातों-रात अवैध निर्माण और अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, ताकि किसान अपनी आबादी का दायरा दिखा सकें। तीसरा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण द्वारा मुआवजे की दरें बढ़ाए जाने के बाद अब नए नोएडा के किसानों पर भी सबसे कम दर पर जमीन न देने का भारी दबाव बन चुका है।

📈 4. मुआवजे की दरों में अंतर से उलझा मामला, यमुना और ग्रेटर नोएडा से कम हैं नए नोएडा के रेट

इस साल अप्रैल में हुई बोर्ड बैठक में नए नोएडा के लिए जमीन अधिग्रहण की दर 4300 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय की गई थी। इसके विपरीत, यमुना प्राधिकरण ने अपनी दरें बढ़ाकर 4558 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर ली हैं, जबकि तीन दिन पहले ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने दरों में 55 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी करते हुए इसे 6415 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया है। नोएडा में भी यह दर 5324 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। सबसे कम दर होने के कारण अब नए नोएडा के किसानों से जमीन लेना प्राधिकरण के लिए आसान नहीं होगा, जिससे औद्योगिक शहर के बसने में और अधिक विलंब तय माना जा रहा है।

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