‘पहले वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया था, अब वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’, अंबेडकरनगर में सीएम योगी का सपा पर तीखा हमला

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अंबेडकरनगर में ₹706 करोड़ की 194 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने सपा पर तीखा हमला बोला।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अंबेडकर नगर में 706 करोड़ से अधिक लागत की 194 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. इसके बाद उन्होंने जनता को संबोधित किया और इस दौरान न सिर्फ अपनी सरकार की उपलब्धियां बताई बल्कि विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने विधानसभा नहीं चलने दी, उनके द्वारा जो कोहराम मचाया गया, सभी ने देखा. सपा की विकास में कोई रुचि नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले नौकरी का विज्ञापन निकलते ही वसूली के लिए भाई-भतीजावाद एक्टिव हो जाता था और युवा योग्यता के बाद भी ठगा महसूस करता था.

उन्होंने आरोप लगाते हुए आगे कहा, ‘कभी हापुड़, मुजफ्फरनगर, कभी लखनऊ तो कभी प्रयागराज दंगे. माहौल इतना खराब था कि नौजवानों के सामने पहचान का संकट था. थानों-तहसीलों में इनका कब्जा था. जिस गाड़ी में सपा का झंडा, समझो उसमें सपा का गुंडा. पहले वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया था, अब वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट है. हर जिले में एक माफिया पाल लिया था. 2017 से पहले मुख्यमंत्री नोएडा नहीं जाते थे, कुर्सी खिसकने का डर होता था. जनता ने अब कुर्सी हमेशा के लिए विदा कर दी है’.

CM ने अखिलेश पर कसा तंज

सीएम योगी ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा, ‘ये 12 बजे सो कर उठने वाले लोग हैं. 2 बजे बबुआ तैयार होंगे, फिर चच्चू कुछ सिखाएंगे. फिर जिम जाएंगे. फिर महफिल जम जाएगी. उसके बाद उन्हें पता नहीं होता कि देश में क्या हो रहा है, लेकिन आज यूपी में सब चंगा, नो कर्फ्यू, नो दंगा है’.

लखनऊ में भी विपक्ष पर निशाना

इससे पहले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर लखनऊ में भी सीएम योगी ने विपक्ष पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा कि 2017 से पहले राज्य में सत्ता में रहे लोगों के पास विकास की कोई दृष्टि नहीं थी. जब सत्ता में बैठे लोग काम में रुचि नहीं रखते, तो राज्य का पतन तो होगा ही. इस लापरवाही के कारण राज्य महीनों तक कर्फ्यू और दंगों की चपेट में रहा. 2014 में देश में और 2017 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार बनने से पहले कारीगरों के विकास के लिए काम किया जा सकता था, लेकिन इसके लिए दूरदर्शिता और सोच की जरूरत है.

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