मनोहर लाल का करनाल दौरा: पानी, आतंकवाद और पर्यटन पर कही ये बड़ी बातें
करनाल दौरे पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर। यमुना जल समझौते, पाकिस्तान के साथ संबंध, पर्यटन नीति और सरस्वती नदी पुनर्जीवन परियोजना पर दी अहम जानकारी।
करनाल: करनाल पहुंचे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने दिशा बैठक से पहले रेस्ट हाउस में मीडिया से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने अपनी जेब में रखी छोटी गीता दिखाते हुए लोगों से आह्वान किया कि गीता केवल पढ़ने की नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि, “गीता का ज्ञान व्यक्ति को सही दिशा और जीवन जीने की प्रेरणा देता है.”
पर्यटन नीति और इतिहास को नई पहचान: हरियाणा की नई पर्यटन नीति पर चर्चा करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि, “प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं. लोहागढ़ किले और लोहागढ़ फाउंडेशन केवल ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली विरासत के प्रतीक हैं. बाबा बंदा सिंह बहादुर के संघर्ष और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है. बच्चों को अपने इतिहास से जोड़ना राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है.”
सरस्वती नदी परियोजना पर सरकार का फोकस: केंद्रीय मंत्री ने सरस्वती नदी पुनर्जीवन परियोजना को लेकर भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि, “सरकार इस दिशा में लगातार कार्य कर रही है और संबंधित स्थलों का निरीक्षण भी किया गया है. यह केवल एक नदी नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता की पहचान है, जिसके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए गंभीर प्रयास जारी हैं.”
राजस्थान को पानी देने के मुद्दे पर स्पष्ट जवाब: यमुना के पानी को लेकर इनेलो द्वारा उठाए गए सवालों पर मनोहर लाल ने कहा कि, “राजस्थान को अतिरिक्त पानी देने का विषय कोई नया नहीं है, बल्कि वर्षों पुराने समझौतों और नीतियों का हिस्सा है. यदि यमुना का अतिरिक्त जल राजस्थान को मिलता है तो इसमें किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए. यह फैसला आपसी सहमति और निर्धारित जल नीति के तहत लिया गया है.”
पाकिस्तान पहले आतंकवाद छोड़े, फिर आगे बढ़ेगी बात: भारत-पाकिस्तान संबंधों और व्यापार बहाली को लेकर पूछे गए सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने दो टूक कहा कि, “पाकिस्तान को सबसे पहले यह स्पष्ट करना होगा कि वह आतंकवाद को संरक्षण नहीं देगा. जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और जब पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ईमानदार रुख अपनाएगा, तब बाकी मुद्दों पर भी सकारात्मक माहौल बन सकता है.”
चिनाब के पानी से कई राज्यों को मिलेगा लाभ: चिनाब नदी के पानी को अन्य नदियों के माध्यम से हरियाणा तक पहुंचाने की संभावनाओं पर मनोहर लाल ने कहा कि, “इससे जल संकट काफी हद तक कम होगा. पंजाब सहित कई राज्यों में पानी की कमी की समस्या है और यदि इस दिशा में योजनाएं सफल होती हैं तो कई प्रदेशों को राहत मिलेगी तथा जल संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा.
गैंगस्टर नेटवर्क से युवाओं को बचाने की अपील: प्रदेश में गैंगस्टर गतिविधियों और युवाओं के उनके प्रभाव में आने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि, “कुछ असामाजिक तत्व युवाओं को लालच देकर अपराध की राह पर धकेलने का प्रयास करते हैं, लेकिन युवाओं को ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए. फिरौती या धमकी जैसे मामलों में डरने की बजाय तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए. हरियाणा पुलिस और सरकार ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई कर रही है.”
इथेनॉल और आत्मनिर्भर भारत की दिशा: इथेनॉल उत्पादन से जुड़े सवाल पर मनोहर लाल ने कहा कि, “सरकार इस क्षेत्र में लगातार काम कर रही है. यदि देश में उपलब्ध संसाधनों से ही ऊर्जा के विकल्प तैयार होते हैं तो यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम होगा. विशेषज्ञों की टीम इस क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों पर काम कर रही है.”
यूनिटी मॉल बनेगा स्थानीय उत्पादों का बड़ा मंच: पीएम यूनिटी मॉल परियोजना पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, “इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को राष्ट्रीय स्तर का बाजार उपलब्ध कराना है. इस परियोजना के माध्यम से प्रदेश और देश के पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान मिलेगी तथा स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा.”
अमरनाथ यात्रियों की सेवा में करनाल आगे: अमरनाथ यात्रा को लेकर करनाल से रवाना किए गए भंडारा वाहन कार्यक्रम में भी मनोहर लाल शामिल हुए. उन्होंने कहा कि, “करनाल की सामाजिक संस्थाएं हर वर्ष श्रद्धालुओं की सेवा के लिए आगे आती हैं और यह सेवा भाव प्रदेश की पहचान है.” उन्होंने वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और सभी स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दीं.
“जब बाबा बुलाएंगे, तब जरूर जाऊंगा”: जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह स्वयं अमरनाथ यात्रा पर जाएंगे, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “जब बाबा बुलाएंगे, तब जरूर जाऊंगा.” यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि, “हर वर्ष व्यापक तैयारियां की जाती हैं. सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन की लगातार बैठकें होती हैं तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहती है.”