मुरादाबाद में तेंदुओं का आतंक, 1 महिला की मौत व 12 घायल; थर्मल ड्रोन और 18 पिंजरों से सर्च ऑपरेशन

मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में तेंदुओं के हमले से 12 घायल और 1 की मौत। थर्मल ड्रोन व पिंजरों से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा तहसील इलाके में तेंदुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे दर्जनों गांवों के ग्रामीणों में भारी दहशत है. तेंदुओं के हमलों में अब तक 12 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं, जबकि एक महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें बड़े पैमाने पर कॉम्बिंग और सर्च ऑपरेशन चला रही हैं. थर्मल इमेजिंग और ड्रोन कैमरों की मदद से तेंदुओं की मूवमेंट पर पैनी नजर रखी जा रही है.

इलाके में 18 से अधिक पिंजरे लगाए जा चुके हैं, जिनमें से अब तक दो तेंदुए, जिसमें एक लालापुर और दूसरा बलिया गांव से ट्रैप किए जा चुका है. प्रशासन ने ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए 60 से 70 कर्मचारियों की फौज मैदान में उतारी है. साथ ही वाइल्डलाइफ SOS (आगरा) और WWF की विशेषज्ञ टीमों को भी रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल किया गया है. अधिकारियों द्वारा गांव-गांव चौपाल लगाकर लोगों को अकेले खेतों में न जाने, समूह में काम करने और लाठी-डंडे साथ रखने की सख्त हिदायत दी जा रही है. प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद और घायलों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है.

प्रशासन का सर्च ऑपरेशन और बचाव की तैयारियां

तेंदुओं को पकड़ने के लिए वन विभाग ने संभल, रामपुर, अमरोहा और बिजनौर से अतिरिक्त बल तैनात किया है. थर्मल ड्रोन और ट्रैप केज की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है. जिलाधिकारी और DFO के अनुसार, अब तक दो तेंदुए पकड़े जा चुके हैं, जबकि अन्य की तलाश जारी है. क्षेत्र पंचायत और नगर पालिकाओं के माध्यम से 10 नए पिंजरे मंगवाए गए हैं. कांवड़ यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए कांवड़ पथ पर विशेष मोबाइल वैन, लाइटिंग और पुलिस पिकेट की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके.

प्रशासन और वन विभाग ने ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया है, लोगों से अपील की गई है कि वे रात के समय खेतों में बिल्कुल न जाएं और दिन में भी 7 से 8 लोगों के समूह में ही काम पर निकलें. खेतों में काम के दौरान धुआं करने, आपस में बातचीत करते रहने और लाठी-डंडे साथ रखने की सलाह दी गई है. इसके अलावा, मवेशियों को खेतों की बजाय सुरक्षित घरों के भीतर बांंधने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तेंदुओं को शिकार का मौका न मिले.

राहत सहायता और घायलों का मुफ्त इलाज

तेंदुओं के हमलों में घायल हुए सभी नागरिकों के इलाज का पूरा खर्च प्रशासन द्वारा उठाया जा रहा है. हमले में जान गंवाने वाली महिला के परिजनों को दैवीय आपदा कोष से आर्थिक सहायता राशि प्रदान कर दी गई है. इसके अलावा, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की है. सपा विधायक नवाब जान खान ने घायलों को 25-25 हजार रुपये और मृतका संतोष के परिवार को 50 हजार रुपये की निजी आर्थिक मदद सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की है.

तेंदुओं की लगातार मौजूदगी को देखते हुए डिलारी और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. पुलिस टीमें लाउडस्पीकर के जरिए मुनादी करवाकर लोगों को सतर्क रहने और घरों के भीतर रहने की अपील कर रही हैं. दूसरी ओर, बार-बार हो रहे हमलों से ग्रामीणों का गुस्सा भी भड़क रहा है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग ने जल्द ही बचे हुए तेंदुओं को रेस्क्यू नहीं किया, तो वे किसानों और ग्रामीणों को साथ लेकर उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगे.

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