वायरल कॉन्स्टेबल शेर सिंह का सच आया सामने, जानें IG का बयान

जंतर-मंतर पर इस्तीफा देने वाले वायरल कॉन्स्टेबल शेर सिंह को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। कुमाऊं रेंज की IG निवेदिता कुकरेती ने बताया कि वह पहले से सस्पेंड और जेल जा चुका है।

उत्तराखंड पुलिस के एक कॉन्स्टेबल शेर सिंह का वीडियो बीते दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था, जिसमें वह जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के आंदोलन में पहुंचा था. वहां शेर सिंह ने मंच से आंदोलन के समर्थन में CJP चीफ अभिजीत दीपके को अपना इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद कॉन्स्टेबल चर्चा का विषय बन गया था. हालांकि अब इसकी सच्चाई सामने आई है. कुमाऊं रेंज की IG निवेदिता कुकरेती ने बताया कि कॉन्स्टेबल शेर सिंह फिलहाल सस्पेंड चल रहा है. वह जेल भी जा चुका है.

कुमाऊं रेंज IG निवेदिता कुकरेती ने बताया कि कॉन्स्टेबल शेर सिंह जून 2026 से पिथौरागढ़ जिले में अपनी ड्यूटी से बिना अनुमति के अनुपस्थित था. लगातार गैरहाजिर रहने के कारण जुलाई 2026 में उसे सस्पेंड कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन को लेकर उसके वायरल बयान की भी जांच की जा रही है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

बिना सूचना ड्यूटी से था गायब

पुलिस के अनुसार, शेर सिंह 28 जून 2026 से बिना किसी अनुमति के ड्यूटी पर नहीं आया. इस संबंध में पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक ने उसे नोटिस भी जारी किया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद 20 जुलाई 2026 को उसे सस्पेंड कर दिया गया.

पहले से दर्ज हैं आपराधिक मामले

पुलिस का कहना है कि शेर सिंह का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है. आरोप है कि वह अपने एक साथी के साथ एक कुख्यात अपराधी के गिरोह के संपर्क में था. उस पर लोगों को डराकर उनकी जमीन पर कब्जा करने जैसी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप भी लगे हैं.

इसी मामले में वर्ष 2025 में हरिद्वार में उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी. पुलिस ने 15 सितंबर 2025 को उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था. कई महीने जेल में रहने के बाद वह फिलहाल जमानत पर बाहर है. इस मामले में भी उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई पहले से जारी है.

IG निवेदिता कुकरेती ने कहा कि छात्र आंदोलन के समर्थन में दिए गए उसके वायरल बयान को गंभीरता से लिया गया है. विभाग इस वीडियो की जांच कर रहा है. जांच के आधार पर आवश्यक कानूनी व विभागीय कार्रवाई की जाएगी.

अफवाहों से बचने की अपील

वहीं उत्तराखंड पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें. किसी भी मामले में केवल पुलिस और प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी को ही सही माना जाए.

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