Ghaziabad News: शालीमार गार्डन में 2 बुजुर्गों की संदिग्ध मौत, 3 दिन बाद फ्लैट से आई बदबू
गाजियाबाद की डीएलएफ कॉलोनी के एक फ्लैट में 2 बुजुर्गों के शव मिलने से हड़कंप। नेम सिंह और राकेश शर्मा की मौत पर पुलिस की जांच जारी। 'ऑपरेशन सवेरा' पर उठे सवाल।
गाजियाबाद के शालीमार गार्डन थाना क्षेत्र की डीएलएफ कॉलोनी के एक फ्लैट में दो बुजुर्गों की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। दोनों बुजुर्ग लगभग 20 साल से परिवार से अलग रह रहे थे। तीन दिन तक जब कोई भी फ्लैट से बाहर नहीं निकला और फ्लैट से बदबू आने लगी तब पड़ोसी ने पुलिस को सूचना दी। प्रथमदृष्टया पुलिस दोनों की स्वाभाविक मौत मान रही है।
एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह ने बताया कि शुक्रवार सुबह लगभग साढ़े 9 बजे पुलिस को सूचना मिली थी कि डीएलएफ कॉलोनी में भगत सिंह चौक के पास फ्लैट संख्या बी1एस2 से बदबू आ रही है। यह फ्लैट गुरुग्राम में रहने वाले मुकेश नंदन का है। दोनों बुजर्ग पिछले दो साल से यहां किराए पर रहते थे। पुलिस मौके पर पहुंची तो फ्लैट के एक कमरे में मूलरूप से न्यू सीमा पुरी दिल्ली निवासी 60 वर्षीय नेम सिंह और दूसरे कमरे में मूलरूप से कांति नगर निवासी 74 वर्षीय राकेश शर्मा मृत हालत में पड़े मिले। दोनों के शव देखने से दो से तीन दिन पुराने लग रहे थे। मौके से दोनों के आधार कार्ड मिले हैं। आधार कार्ड पर दर्ज पते पर पुलिस टीम भेजी गई थी, लेकिन परिवार नहीं मिला।
एसीपी ने बताया कि राकेश शर्मा और नेम सिंह दोनों ऑटो चलाते थे। राकेश शर्मा ने आयु ज्यादा होने के कारण अपना ऑटो नेम सिंह को किराए पर दे दिया था। नेम सिंह ऑटो चलाता था और राकेश शर्मा की देखभाल भी करता था। राकेश शर्मा पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे और कुछ समय से उनकी हालत बहुत ज्यादा खराब थी। राकेश शर्मा बेड से न तो उठ पाते थे और न ही बोल पाते थे। उन्हें बीमारी क्या थी और इलाज कहां से चल रहा था, इसका भी पता नहीं चल सका है। नेम सिंह शराब के आदि थे। दोनों के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले। दोनों की मौत स्वाभाविक लग रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोनों के परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है।
ऑपरेशन सवेरा पर सवाल
कमिश्नरेट पुलिस ने ऑपरेशन सवेरा अभियान के तहत अकेले रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और मदद का दावा किया था, लेकिन डीएलएफ कॉलोनी के फ्लैट में दो बुजुर्गों के शव मिलने के बाद ऑपरेशन सवेरा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। दोनों बुजुर्ग कई दिनों तक फ्लैट में मृत पड़े रहे और स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। बुजुर्गों को नियमित देखभाल और चिकित्सकीय मदद की जरूरत थी। इसके बावजूद न तो बीट पुलिस अधिकारियों ने उनका हाल जाना और न ही उन्हें ऑपरेशन सवेरा के तहत रजिस्ट्रेशन कराया गया।
फ्लैट का दरवाजा खुला था
पुलिस ने बताया कि फ्लैट का दरवाजा अंदर से बंद नहीं था। लोहे और लकड़ी वाले दोनों दरवाजे केवल बंद थे, अंदर से लॉक नहीं थे। बताया गया कि तीसरी मंजिल पर गर्मी ज्यादा होती है और छोटा फ्लैट होने के कारण हवा की आवाजाही के लिए दिन में अक्सर फ्लैट का दरवाजा खुला ही रहता था।
पहले भाई के पास रहते थे
एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह ने बताया कि तीन मंजिला इमारत में प्रत्येक मंजिल पर तीन एलआईजी फ्लैट हैं। दोनों बुजुर्ग पहले इसी इमारत में पहली मंजिल पर रहते थे। लगभग दो साल पहले फ्लैट मालिक के फ्लैट बेचने के बाद दोनों तीसरी मंजिल पर मुकेश नंदन के फ्लैट किराए पर रहने लगे थे। आसपास में पूछताछ करने पर पता चला कि नेम सिंह पहले दिलशाद गार्डन में अपने बड़े भाई और पत्नी व बेटे के साथ रहते थे।
अतुल कुमार सिंह, एसीपी शालीमार गार्डन, ”संबंधित चौकी के पुलिसकर्मी बुजुर्गों के संपर्क में थे। हालांकि, ऑपरेशन सवेरा के तहत पंजीकरण हुआ था या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। इस संबंध में जानकारी जुटाई जाएगी।”