20 सालों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के पक्का होने की जगी उम्मीद, हाई कोर्ट ने जारी किया सख्त आदेश
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को 20 सालों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) के नियमितीकरण पर 3 महीने में निर्णय लेने का आदेश दिया है।
चंडीगढ़ । हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पिछले करीब दो दशकों से पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) के स्थायीकरण और नियमितीकरण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह अतिथि शिक्षकों को पक्का करने की वर्षों पुरानी मांग पर तीन महीने के भीतर एक स्पष्ट, निष्पक्ष और कारण सहित निर्णय (Reasoned Order) पारित करे।
🏛️ भिवानी और झज्जर के शिक्षकों की याचिका पर हाई कोर्ट का आदेश: व्यक्तिगत रूप से सुना जाएगा पक्ष
अदालत ने शिक्षा विभाग के संबंधित उच्चाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे भिवानी और झज्जर जिलों के अतिथि शिक्षकों द्वारा दायर की गई याचिका को एक विस्तृत प्रतिवेदन (Representation) मानकर उस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें।
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व्यक्तिगत सुनवाई: हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को याचिकाकर्ता शिक्षकों का पक्ष व्यक्तिगत रूप से सुनने और सभी तथ्यों व साक्ष्यों का परीक्षण करने के आदेश दिए हैं।
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समय सीमा: संपूर्ण कानूनी प्रक्रिया को पूरा करते हुए 3 माह के भीतर अंतिम निर्णय सुनाना अनिवार्य किया गया है।
📜 2005 से 2007 के बीच हुई थी नियुक्तियां, नियमित अध्यापकों की तरह कर रहे हैं काम
याचिकाकर्ता शिक्षकों ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए बताया कि उनकी नियुक्तियां वर्ष 2005 से 2007 के बीच राज्य सरकार द्वारा तय की गई निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत पारदर्शी तरीके से हुई थीं।
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20 वर्षों की सेवा: वे पिछले 20 वर्षों से लगातार सरकारी विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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समान कार्य: वे नियमित अध्यापकों की तरह ही स्थायी प्रकृति के सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमितीकरण का लाभ नहीं दिया गया है, जो कि उनके अधिकारों का हनन है।
⚖️ ‘हरियाणा अतिथि शिक्षक सेवा अधिनियम 2019’ और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
शिक्षकों की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने अदालत को बताया कि ‘हरियाणा अतिथि शिक्षक सेवा अधिनियम, 2019’ के तहत उन्हें 58 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा तो प्रदान की गई है, लेकिन जब बात उन्हें स्थायी (पक्का) करने की आती है, तो सरकार लगातार चुप्पी साधे रहती है।
शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट्स के पूर्व में आए समान फैसलों का हवाला दिया। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सभी दलीलों को न्यायसंगत मानते हुए संबंधित अधिकारी को शिक्षकों का पक्ष सुनने और 3 महीने के भीतर अंतिम आदेश पारित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।