डूंगरपुर: महिला वकील का 11 साल से सामाजिक बहिष्कार, 21 लाख की रंगदारी मांगी
डूंगरपुर की महिला वकील ज्योत्स्ना लबाना का 11 वर्षों से सामाजिक बहिष्कार। पंचों पर 21 लाख की रंगदारी मांगने और जानलेवा हमले का आरोप।
राजस्थान के डूंगरपुर जिले के रामसागड़ा थाना क्षेत्र के माड़ा गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो आधुनिक समाज के दावों पर तमाचा मारता है. यहां कानून की पढ़ाई कर चुकी और दिल्ली में जुडिशियरी की तैयारी कर रही एक महिला अधिवक्ता ज्योत्स्ना लबाना को अपने ही परिवार की सुरक्षा के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. पीड़िता ने समाज के कथित ठेकेदारों और पंचों पर 11 वर्षों से सामाजिक बहिष्कार करने, जानलेवा हमले करवाने और शुद्धिकरण के नाम पर 21 लाख रुपये का अवैध दंड मांगने के संगीन आरोप लगाए हैं.
पीड़िता ज्योत्स्ना लबाना के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ 10 अगस्त 2015 को हुई एक दुर्घटना है. तब पीड़िता का भाई रिंकू उर्फ जितेंद्र लबाना अपने दो दोस्तों (राजू और जमनालाल) के साथ मोटरसाइकिल से जा रहा था. रास्ते में पुलिस नाकाबंदी देखकर भागने के दौरान तत्कालीन प्रोबेशनर थानाधिकारी ने उनका पीछा किया, जिससे घबराकर राजू और जमनालाल की एक बिना मुंडेर के कुएं में गिरने से मौत हो गई.
इस हादसे के बाद समाज के कुछ पंचों-मुखियों ने मनगढ़ंत आरोप लगाया कि रिंकू ने पुलिस के साथ मिलकर अपने दोस्तों की हत्या करवाई है. समाज ने रिंकू का नार्को टेस्ट कराने की शर्त रखी. नार्को टेस्ट में रिंकू के खिलाफ कुछ भी नहीं मिला और वह पूरी तरह निर्दोष साबित हुआ. इसके बावजूद पंचों ने परिवार को दोबारा समाज में शामिल करने के बदले 21 लाख के भारी-भरकम दंड (रंगदारी) की मांग कर डाली. इस सामाजिक कलंक और भारी सदमे के कारण पीड़िता के पिता प्रभुलाल लबाना और मामा बंशीलाल लबाना की हार्ट अटैक से मौत हो गई.
‘घर फूंकने की कोशिश की, मां को डायन कहकर पीटा’
पीड़िता ने जिला कलेक्टर को दी अपनी शिकायत में बताया कि वर्ष 2015 से लेकर अब तक उनका परिवार लगातार नरक जैसी जिंदगी और सामाजिक बहिष्कार झेल रहा है. इस दौरान उन पर कई बार जानलेवा हमले भी हुए:
- रक्षाबंधन 2015: मृतकों के परिजनों ने पीड़िता के पूरे घर पर केरोसिन डालकर उसे जिंदा जलाने का प्रयास किया, जहां पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह उनकी जान बचाई.
- नवंबर 2016: कॉलेज से घर लौटते समय पीड़िता ज्योत्स्ना के साथ सरेराह अभद्रता और मारपीट की गई.
- वर्ष 2023: पीड़िता की बूढ़ी मां लसी देवी के साथ गंभीर मारपीट की गई.
- 17 जून 2026: हाल ही में एक मृत्यु भोज के दौरान पीड़िता के चाचा तेजपाल और मां लसी देवी पर सार्वजनिक रास्ते पर लाठियों, पत्थरों और पेट्रोल जैसे ज्वलनशील पदार्थ से हमला किया गया, जिसमें वे बाल-बाल बचे.
11 गांवों के पंचों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
पीड़िता के मुताबिक, माड़ा, गामड़ी, लोड़वाड़ा, बिछीवाड़ा, आड़ीवाली, मांडवी, मुंगाना, मोर, पादर सहित कुल 11 गांवों के पंचों के एक तुगलकी फैसले के कारण उनका पूरा परिवार पिछले 11 सालों से प्रताड़ित हो रहा है. वर्तमान में ज्योत्स्ना दिल्ली में पढ़ाई कर रही है और उसकी मां गांव में बिल्कुल अकेली रहती है, जिनकी जान को हर वक्त खतरा बना रहता है.
पीड़िता ज्योत्स्ना लबाना ने कहा- जो लोग खुद को समाज का मुखिया कहते हैं, वे मेरी मां को डायन कहकर प्रताड़ित कर रहे हैं. हमसे 21 लाख की रंगदारी मांगी जा रही है और मना करने पर हमारे ऊपर पेट्रोल से हमला किया जा रहा है. मैंने जिला प्रशासन से पवन, सीमा, ईशा, भूरा, धनराज, अभिषेक सहित 20-25 नामजद आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और हमारी जान-माल की रक्षा के लिए सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है. कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन को जांच के आदेश दिए हैं, ताकि इस पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके.