राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के बयान पर अखिलेश यादव का तंज, बोले— ‘गोरखपुर मॉडल ने खोली गुजरात मॉडल की पोल’
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के बयान पर अखिलेश यादव ने तंज कसा है। जानिए 'गोरखपुर मॉडल' और 'गुजरात मॉडल' पर क्यों गरमाई सियासत।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी में दिए गये बयान को लेकर तंज कसा और भाजपा पर हमला बोला. उन्होंने सोशल साइट एक्स पर लिखा, गोरखपुर मॉडल की पोल खोलते-खोलते तुलना के रूप में गुजरात मॉडल की घपलेबाजी की बात भी सामने आ गई, दोनों में जो बातें कॉमन हैं, वो ये हैं कि दोनों जगह भाजपाई सरकार है और भाजपाई महा-भ्रष्टाचार भी. आपसी टकराहट ने तो डबल इंजन को ट्रबल इंजन बना दिया है.
बता दें कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से एक साल पहले राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है. राज्यपाल ने हॉस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टूडेंट सुविधाओं को लेकर दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी और स्थायी प्रशासन की खिंचाई की है. राज्यपाल के तौर पर, आनंदीबेन पटेल उत्तर प्रदेश में राज्य विश्वविद्यालय की चांसलर हैं.
गुरुवार को विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह में बोलते हुए राज्यपाल ने कहा कि लोगों को यह पसंद न आए, लेकिन हमें अपनी कमियां दिखानी होंगी. अगले तीन महीने में मुझे दिखाओ कि इन कमियों को दूर किया गया है और यह गोरखपुर है, मुख्यमंत्री का घर. अगर यहां ऐसी कमियां हैं, तो क्या होगा?
राज्यपाल के बयान से गरमाई सियासत
राज्यपाल कीये बातें राजनीतिक महत्व रखती हैं क्योंकि ये गोरखपुर में कही गई थीं, जहां से आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने से पहले लगातार पांच बार सांसद रहे हैं. गोरखपुर गोरखनाथ मठ का भी घर है, जिसके आदित्यनाथ महंत हैं.
राज्यपाल ने कहा कि यूनिवर्सिटी में नौ हॉस्टल हैं छह लड़कों के लिए और तीन लड़कियों के लिए लेकिन लड़कों के हॉस्टल में मेस की सुविधा नहीं है. उन्होंने पूछा, गर्ल्स हॉस्टल में मेस चल रही है, बॉयज हॉस्टल में नहीं चलती. क्यों, टिफिन में अच्छा लगता है? गर्ल्स हॉस्टल में मेस की सुविधा है, लेकिन बॉयज हॉस्टल में नहीं है क्यों? क्या बाहर का खाना बेहतर है?
पटेल ने कहा कि उन्होंने अपने रहने के दौरान कैंपस में परोसे जाने वाले खाने की जांच की, कुकिंग ऑयल की क्वालिटी पर सवाल उठाए, और खाने के सैंपल की टेस्टिंग का आदेश दिया.
राज्यपाल ने गुजरात का दिया उदाहरण
एक समय पर, उन्होंने कहा कि जब सैंपल का एक सेट टेस्टिंग के लिए भेजा गया था, तो उन्होंने दूसरा सेट इकट्ठा किया जिसे वह लखनऊ में टेस्टिंग के लिए भेजेंगी. उन्होंने कहा कि कभी-कभी, सैंपल बदल जाते हैं. गुजरात में ऐसा होता था. सैंपल ले जाता था और कौन ले गया. अधिकारियों को कहा है कि हम वहां जाकर टेस्ट करवाएंगे. मैं यह राज्यपाल के तौर पर नहीं कह रही हूं. मैं एक मां हूं. हमारे बच्चों को सही खाना मिलना चाहिए.
उन्होंने कहा कि और ऐसा ही खाते रहेंगे तो दिमाग ही नहीं चलेगा. मैंने कहा है, जो भी रिपोर्ट आए, वीसी तो दे दीजिए.भविष्य में ऐसा नहीं हो. इसके लिए प्रयास हो. टिफिन का खाना बंद करवाओ और आप खुद व्यवस्था करो. इतनी ताकत नहीं है.