डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला, ड्रोन और स्पेयर पार्ट्स पर लगाया 100% तक टैरिफ; भारत को हो सकता है फायदा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ड्रोन और उनके पार्ट्स पर 100% तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। जानें भारत व चीन पर असर।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ड्रोन और उनके पार्ट्स के इंपोर्ट पर भारी टैरिफ लगाने का फैसला किया है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका ड्रोन और उनके कलपुर्जों के लिए विदेशी स्रोतों पर बहुत ज्यादा डिपेंड है. इस स्थिति के लिए देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को बहुत खतरा पैदा होता है.

व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप की ओर से साइन किए गए आदेश के तहत कुछ खास आकार और क्षमताओं वाले ड्रोन पर 100 फीसदी एड वैलोरम यानी मूल्य-आधारित टैरिफ लगाया जाएगा. ये वे ड्रोन हैं जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना गया है. वहीं, छोटे आकार के ड्रोन पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा.

प्रमुख सहयोगी देशों के ड्रोन और उनके पार्ट्स पर भी टैरिफ

अमेपिका ने अपने कुछ प्रमुख सहयोगी देशों से आने वाले ड्रोन और उनके पार्ट्स के लिए अलग-अलग टैरिफ तय किए गए हैं. अमेरिकी सरकार ने यूरोपीय संघ, जापान, लिकटेंस्टीन, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान से आने वाले ड्रोन और उनके पार्ट्स पर 15 फीसदी टैरिफ लगेगा. वहीं, ब्रिटेन से आने वाले ड्रोन पर 10 फीसदी एड वैलोरम टैरिफ लगाया जाएगा.

व्हाइट हाउस ने कहा कि नए टैरिफ 21 दिनों के भीतर लागू हो जाएंगे. वहीं, जो ड्रोन्स और उसके पार्ट कम संवेदनशील माने जाते हैं, उसपर तय किए गए टैरिफ 180 दिन बाद लागू होगा. इसी तरह, जिन प्रोडक्ट्स को पेंटागन ने आदेश पर हस्ताक्षर होने के 20 दिनों के भीतर फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) की कवर्ड लिस्ट से छूट के लिए मंजूरी दी है, उन पर भी टैरिफ 180 दिन बाद लागू होगा.

ट्रंप को क्यों लेना पड़ा ऐसा फैसला?

ट्रंप ने अपने आदेश में कहा कि कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक ने अमेरिका में बिना पायलट वाले एयरक्राफ्ट सिस्टम यानी UAS के इंपोर्ट के असर की जांच की थी. इस जांच में यह सामने आया कि विदेशी निर्माताओं से UAS का इंपोर्ट काफी ज्यादा है. ऐसे में अमेरिका ड्रोन तथा उनके पार्ट्स के लिए विदेशी स्रोतों पर बहुत ही ज्यादा निर्भर हो गया हैय

ट्रंप के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया कि कुछ विदेशी कंपनियों के ड्रोन और उनके पार्ट्स अमेरिका की सुरक्षा और बचाव के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं. इसके अलावा, अमेरिका का घरेलू ड्रोन उद्योग देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त उत्पादन नहीं कर रहा है.

क्या ट्रंप का यह फैसला ‘अमेरिका फर्स्ट’ व्यापार नीति का हिस्सा?

फिलहाल, ड्रोन पर टैरिफ लगाने का यह फैसला ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ व्यापार नीति का हिस्सा माना जा रहा है. कानूनी चुनौतियों और विश्लेषकों की आलोचना के बावजूद ट्रंप प्रशासन ने लगातार टैरिफ को अपनी व्यापार और विदेश नीति का अहम हथियार बनाया हुआ है. ट्रंप प्रशासन के टैरिफ को लेकर फैसले काअसर ड्रोन की कीमतों, अमेरिकी बाजार में विदेशी कंपनियों की मौजूदगी और घरेलू ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग पर पड़ सकता है.

ट्रंप के इस फैसले का चीन पर कैसे पड़ेगा असर?

ट्रंप प्रशासन ने आदेश में सीधे चीन का नाम लेकर टैरिफ नहीं लगाया है, लेकिन इस फैसले का सबसे बड़ा असर चीन की ड्रोन इंडस्ट्री पर पड़ने की संभावना है. इसकी वजह यह है कि वैश्विक ड्रोन बाजार में चीनी कंपनियों, खासकर DJI, की मजबूत पकड़ है.

उद्योग संगठन AUVSI के मुताबिक चीनी कंपनियां कंज्यूमर ड्रोन बाजार के करीब 90% और एंटरप्राइज ड्रोन बाजार के 70% से ज्यादा हिस्से पर नियंत्रण रखती हैं. अमेरिका पहले ही चीनी ड्रोन टेक्नोलॉजी पर कई तरह की पाबंदियां बढ़ा रहा है. बता दें चीन, अमेरिका में ठीक-ठाक स्तर पर ड्रोन के कलपुर्जे निर्यात करता है.

भारत पर ट्रंप के इस फैसले का क्या होगा असर?

अगर अमेरिकी खरीदार चीन से ड्रोन और उनके पार्ट्स खरीदने से बचते हैं, तो भारत समेत दूसरे देशों के निर्माताओं के लिए अमेरिकी बाजार में जगह बनाने का अवसर बढ़ सकता है. खासकर सर्विलांस, एग्रीकल्चर, मैपिंग और इंडस्ट्रियल ड्रोन में भारतीय कंपनियां फायदा उठा सकती हैं. बता दें कि भारत पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में अपनी क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

Leave A Reply

Your email address will not be published.