पीजीआई चंडीगढ़ पार्किंग का विवाद: मनमानी वसूली पर सवालों के घेरे में प्रशासन

पीजीआई चंडीगढ़ पार्किंग में मनमानी वसूली का आरोप। रसीद में शुल्क का जिक्र नहीं, मरीजों से अधिक पैसे लेने पर रोष। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने जांच का दिया भरोसा।

चंडीगढ़: पीजीआई चंडीगढ़ की पार्किंग व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. सामने आई एक पार्किंग रसीद ने पार्किंग शुल्क वसूली में पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रसीद में वाहन का प्रकार, प्रवेश समय, ऑपरेटर और ठेकेदार का नाम दर्ज है, लेकिन पार्किंग शुल्क का कहीं कोई उल्लेख नहीं है.

पीजीआई की पार्किंग में मनमानी? पीजीआई में रोजाना हजारों मरीज, उनके परिजन और अन्य लोग आते हैं. ऐसे में पार्किंग व्यवस्था सीधे तौर पर आम लोगों से जुड़ा मुद्दा है. कई मरीजों और तीमारदारों का आरोप है कि कुछ पार्किंग स्थलों पर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूली जा रही है. उनका कहना है कि दोपहिया वाहन की पार्किंग के लिए उनसे 10 रुपये लिए गए, जबकि रसीद पर शुल्क का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया.

रसीद में शुल्क का जिक्र नहीं: कई मरीजों और उनके परिजनों ने दावा किया कि ग्राउंड पर पार्किंग शुल्क को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है. कुछ लोगों का आरोप है कि दोपहिया वाहनों से 20 से 40 रुपये तक और चार पहिया वाहनों से 50 से 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं. लोगों का ये भी कहना है कि कई बार रसीद नहीं दी जाती, जबकि कुछ मामलों में “पार्किंग फुल” होने का हवाला देकर अतिरिक्त राशि लेकर वाहन अंदर खड़े करने के आरोप भी सामने आए हैं.

ओवरचार्जिंग का आरोप: कुछ लोगों ने ये भी दावा किया कि रात के समय या अत्यधिक भीड़ के दौरान पार्किंग शुल्क बढ़ा दिया जाता है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. यही कारण है कि पार्किंग रसीदों में शुल्क का स्पष्ट उल्लेख ना होना और कई स्थानों पर रेट लिस्ट का दिखाई ना देना लोगों के बीच संदेह और असंतोष को बढ़ा रहा है. मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि सभी पार्किंग स्थलों पर निर्धारित दरें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हों और डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था पूरी तरह लागू हो, तो इस तरह के विवादों से बचा जा सकता है.

मरीजों और तीमारदारों में रोष: हालांकि अब बड़ा सवाल यह है कि जब टेंडर दस्तावेजों में पार्किंग शुल्क, रेट लिस्ट डिस्प्ले और इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग जैसी व्यवस्थाएं स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं, तो फिर रसीदों में शुल्क का उल्लेख क्यों नहीं किया जा रहा और मरीजों को ओवरचार्जिंग की शिकायतें क्यों करनी पड़ रही हैं. इन सवालों के जवाब अब पीजीआई प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई के बाद ही सामने आ पाएंगे.

पार्किंग टेंडर दस्तावेजों में क्या मिला? पड़ताल में सामने आया कि पीजीआई के पार्किंग टेंडर दस्तावेजों के अनुसार दोपहिया वाहनों के लिए पार्किंग शुल्क 5 रुपये प्रति विजिट निर्धारित है. वहीं कार, वैन और अन्य चार पहिया वाहनों के लिए 8 घंटे तक 10 रुपये तथा 24 घंटे तक 25 रुपये शुल्क तय किया गया है. टेंडर की शर्तों में ये भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि प्रत्येक पार्किंग स्थल पर रेट लिस्ट हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी भाषा में प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग सिस्टम लागू करना, सीसीटीवी कैमरे स्थापित करना और पार्किंग शुल्क की पारदर्शी वसूली सुनिश्चित करना भी ठेकेदार की जिम्मेदारी है.

निर्धारित शुल्क से ज्यादा वसूलने से पर जुर्माने का प्रावधान: दस्तावेजों के अनुसार निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने पर ठेकेदार या उसके कर्मचारियों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है. इसके अलावा शिकायत पेटी स्थापित करना और शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था करना भी अनिवार्य शर्तों में शामिल है.

मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने लिया संज्ञान: इस पूरे मामले पर पीजीआई के नए मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रोफेसर अशोक कुमार ने कहा कि “पार्किंग से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है. डिजिटल पेमेंट और ऑटोमैटिक टिकटिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है. इसके अलावा प्रत्येक पार्किंग स्थल पर रेट लिस्ट प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाएगा. सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने और शिकायतों के समाधान के लिए हेल्पलाइन अथवा शिकायत काउंटर शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है. मरीजों और उनके परिजनों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी. यदि कहीं भी अनियमितता या ओवरचार्जिंग पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.”

पार्किंग ठेकेदार की सफाई: वहीं पार्किंग ठेकेदार के प्रतिनिधियों ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “सभी शुल्क पीजीआई प्रशासन द्वारा निर्धारित किए गए हैं और उसी के अनुसार वसूली की जाती है. यदि कोई कर्मचारी तय शुल्क से अधिक राशि लेते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है. पार्किंग व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए प्रशासन के साथ पूरा सहयोग किया जा रहा है.”

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