भिवानी: फायर सेफ्टी को लेकर शहर के अधिकांश संस्थानों में बड़ी लापरवाही, पढ़ें रिपोर्ट

भिवानी के 85% संस्थानों में फायर सेफ्टी मानकों का अभाव। निजी अस्पताल, कोचिंग सेंटर और पीजी बिना NOC चल रहे हैं। संकरी गलियों के कारण दमकल सेवा को खतरा।

भिवानी। जिले में करीब 85 फीसदी कॉमर्शियल संस्थानों और बहुमंजिला इमारतों में आग से सुरक्षा के निर्धारित मानक पूरे नहीं हैं। स्थिति यह है कि अधिकांश निजी अस्पताल अस्पतालों के बजाय शोरूम श्रेणी की फायर सेफ्टी एनओसी के आधार पर संचालित हो रहे हैं जबकि जिले में किसी भी निजी अस्पताल के पास अस्पताल मानकों के अनुरूप फायर एनओसी नहीं है।

वहीं गेस्ट हाउस, पीजी, कोचिंग संस्थानों, मैरिज और बैक्वेट हाॅल में भी बड़े स्तर पर फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी हो रही है और अधिकांश के पास फायर एनओसी तक नहीं है। ऐसे में किसी भी बड़े हादसे की स्थिति में गंभीर नुकसान की आशंका बनी हुई है। हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होने के बावजूद जिले के अधिकांश कॉमर्शियल संस्थान इसे नहीं ले रहे हैं। भिवानी जिले में 125 से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। इनमें से 72 कोचिंग अकादमियों को शिक्षा विभाग ने मानकों की कमी के चलते बंद करने के नोटिस भी जारी किए थे लेकिन इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ पाया।
जिले में करीब 100 से अधिक निजी अस्पताल संचालित हैं। इनमें से कई अस्पताल संकरी गलियों और ऐसे स्थानों पर चल रहे हैं जहां आग से सुरक्षा के मानकों की अनदेखी हो रही है। कार्रवाई से बचने के लिए कई अस्पतालों ने शोरूम अथवा दुकान श्रेणी की फायर एनओसी ले रखी है जबकि अस्पताल मानकों के अनुरूप एनओसी किसी के पास नहीं है।
यदि शॉपिंग मॉल की बात करें तो वहां फायर सिस्टम के पाइप तो लगे हुए हैं लेकिन उनके सुचारु रूप से काम करने की स्थिति को लेकर सवाल बने हुए हैं। इनमें पानी उपलब्ध है या नहीं इसकी जांच हुए भी कई वर्ष बीत चुके हैं। वहीं दमकल विभाग की ओर से इनकी वार्षिक जांच भी नियमित रूप से नहीं हो रही है।

70 फीसदी निजी स्कूलों के पास मानक पूरे, 30 में प्रबंध अधूरे
मान्यता संबंधी मानकों के कारण जिले के करीब 70 फीसदी निजी स्कूलों ने फायर सेफ्टी के प्रबंध पूरे कर लिए हैं जबकि लगभग 30 फीसदी स्कूलों में अब भी आवश्यक व्यवस्थाएं अधूरी हैं। वहीं प्ले स्कूल और क्रैच में भी पर्याप्त फायर सेफ्टी प्रबंधों की आवश्यकता बनी हुई है। छोटे बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यह स्थिति चिंता का विषय मानी जा रही है।

संकरे बाजारों में अतिक्रमण, समय पर नहीं पहुंच पाएगी दमकल
शहर के कपड़ा बाजार, कॉस्मेटिक्स बाजार, बिचला बाजार, बर्तन बाजार, सराय चौपटा बाजार तथा भीड़ी घाटी क्षेत्र के बाजारों में अतिक्रमण के कारण दमकल वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। शहर थाना पुलिस की ओर से बाजारों में वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है लेकिन अतिक्रमण के कारण हालात ऐसे हैं कि आग लगने की स्थिति में दमकल वाहन को मौके तक पहुंचने में करीब आधा घंटा लग सकता है। इससे नुकसान की आशंका और बढ़ जाती है।

पिछले साल हुए थे दो बड़े हादसे, इस साल कॉमर्शियल संस्थानों में आग की 25 से अधिक घटनाएं
पिछले वर्ष औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक कपड़ा फैक्टरी और एक किराना दुकान के ऊपर बने मकान में आग लगने की बड़ी घटनाएं हुई थीं। कपड़ा फैक्टरी में लगी आग तीन दिन तक सुलगती रही और करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था। वहीं किराना दुकान के ऊपर बने मकान में आग लगने से एक बुजुर्ग की जिंदा जलने से मौत हो गई थी। इस वर्ष भी अब तक कॉमर्शियल संस्थानों में आग लगने की 25 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि इनमें किसी की जान नहीं गई लेकिन लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

बहुमंजिला इमारतों में चल रहे पीजी और गेस्ट हाउस, फायर सेफ्टी एनओसी की नहीं परवाह
शहर में 55 से अधिक गेस्ट हाउस बहुमंजिला इमारतों में संचालित हो रहे हैं। इसी प्रकार 250 से अधिक पीजी भी संचालित हैं जहां सीमित और तंग स्थानों में लोगों को रहने की सुविधा दी जा रही है। कई गेस्ट हाउस तीसरी और चौथी मंजिल पर बने हुए हैं। यदि इनमें आग लग जाए तो बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक अथवा आपातकालीन रास्ता तक उपलब्ध नहीं है। किसी भी गेस्ट हाउस या पीजी के पास दमकल विभाग की फायर सेफ्टी एनओसी नहीं है। जिले में करीब 250 मैरिज और बैक्वेट हाॅल भी संचालित हैं। इनमें से अधिकांश ने भी फायर एनओसी लेना जरूरी नहीं समझा है जबकि विवाह और अन्य आयोजनों के दौरान यहां 500 से 1500 तक लोग एकत्रित होते हैं।

हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विभाग से सभी कॉमर्शियल और निजी संस्थानों द्वारा फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है। मगर अधिकांश संस्थान इसकी अनदेखी कर रहे हैं। विभाग की तरफ से भी समय-समय पर सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस दौरान संबंधित को नोटिस दिया गया है वहीं इसकी सूचना नगर परिषद को भी दी गई है। फायर सेफ्टी के मानक हर संस्थान के लिए अलग-अलग तय किए गए हैं। अस्पताल और बहुमंजिला इमारतों के लिए भी अलग-अलग मानक हैं।

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